ज़िल्ली: करजाकिलावुज़ बुनाई की पुनर्रचना और सांस्कृतिक नवाचार

परंपरा और आधुनिकता के संगम से जन्मा एक अद्वितीय कालीन

परंपरागत शिल्प और आधुनिक डिजाइन के मेल से निर्मित 'ज़िल्ली' कालीन, तुर्की की करजाकिलावुज़ बुनाई तकनीक को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। यह डिजाइन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करता है, बल्कि समकालीन जीवनशैली में भी अपनी प्रासंगिकता सिद्ध करता है।

बेगुम करादाग द्वारा डिज़ाइन किया गया 'ज़िल्ली' कालीन, तुर्की के टेकिरदाग क्षेत्र की ऐतिहासिक करजाकिलावुज़ बुनाई तकनीक का आधुनिक पुनराविष्कार है। यह तकनीक सदियों पुरानी है और भौगोलिक संकेतक के रूप में चिह्नित है, किंतु समय के साथ इसकी कई कृतियाँ लुप्त हो गईं। 'ज़िल्ली' का उद्देश्य इस विलुप्त होती परंपरा को पुनर्जीवित करना और उसे समकालीन रूप में प्रस्तुत करना है। इसमें पारंपरिक बुनाई तकनीक और मौलिक आकृतियों का उपयोग करते हुए, जीवन के खट्टे-मीठे पहलुओं और उर्वरता की कहानियाँ बुनी गई हैं।

इस कालीन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण प्रक्रिया है, जिसमें करजाकिलावुज़ बुनाई और 'चिचिम' तकनीक का प्रयोग किया गया है। 'चिचिम' तकनीक के तहत आकृतियों को बुनाई के दौरान ही उकेरा जाता है, न कि बाद में कढ़ाई के रूप में। यह प्रक्रिया इसे अन्य बुनाई तकनीकों से अलग बनाती है। 'ज़िल्ली' में प्रयुक्त पांच प्रमुख पारंपरिक प्रतीक—घोड़े की नाल (प्रेमियों का मिलन), कुत्ते का पंजा (सुख-समृद्धि), बिच्छू (बुराई से सुरक्षा), तिपतिया घास (सौभाग्य) और कॉकलबूर (समृद्धि)—इसकी सांस्कृतिक गहराई को दर्शाते हैं।

इस कालीन का निर्माण टेकिरदाग के बुरुज़ वर्कशॉप में किया जाता है, जहाँ महिलाओं को सतत रोजगार भी मिलता है। बुनाई के लिए चार पैडल और चार हेडल्स वाले ओक लूम का इस्तेमाल होता है। ऊन को प्राकृतिक वनस्पति रंगों से रंगा जाता है और ताना में बिना रंगी हुई सूती धागे का प्रयोग किया जाता है। तीन भागों में बनी बुनाई को हाथ से क्रोशिया टांकों द्वारा जोड़ा जाता है और अंत में सूती अस्तर लगाया जाता है, जिससे कालीन का पिछला भाग सुरक्षित रहे। प्रत्येक फ्रिंज को भी हाथ से जोड़ा जाता है, जिससे हर टुकड़ा अद्वितीय बनता है।

'ज़िल्ली' का निर्माण पूरी तरह हस्तनिर्मित और सीमित संस्करण में होता है, जिससे हर कालीन में व्यक्तिगत स्पर्श और विशिष्टता बनी रहती है। यह न केवल एक सजावटी वस्तु है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का संवाहक भी है। इसकी डिजाइन प्रक्रिया में स्थानीय इतिहास, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सौंदर्यशास्त्र का समावेश किया गया है। बेगुम करादाग और उनकी टीम ने पुराने नमूनों का अध्ययन कर, धागों की व्यवस्था और तकनीकी पहलुओं को समझकर इस कालीन को नया जीवन दिया है।

'ज़िल्ली' को 2025 में प्रतिष्ठित ए' डिज़ाइन अवॉर्ड के ब्रॉन्ज श्रेणी में सम्मानित किया गया, जो इसकी तकनीकी उत्कृष्टता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक योगदान का प्रमाण है। यह कालीन न केवल तुर्की की शिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है, बल्कि सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रकार, 'ज़िल्ली' कालीन पारंपरिक बुनाई की विरासत को संरक्षित करते हुए, आधुनिक डिजाइन के साथ एक नया संवाद स्थापित करता है। यह उन लोगों के लिए आदर्श है, जो अपने जीवन में कला, संस्कृति और स्थायित्व का समावेश करना चाहते हैं।


परियोजना का विवरण और श्रेय

परियोजना के डिज़ाइनर: Begum Karadag
छवि के श्रेय: The photos in pdf format were taken by Begum Karadag. The other photos were taken by Tekirdag Municipality press officers.
परियोजना टीम के सदस्य: Begum Karadag
परियोजना का नाम: Zilli
परियोजना का ग्राहक: BURUZ DESIGN


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